SUBJECT - MISSION & EVANGELISM// LESSON - 5 // सुसमाचार प्रचार के तरीके /
सुसमाचार प्रचार
के तरीके
सुसमाचार प्रचार के बहुत से तरीके है लेकिन उनमेसे कुछ पर चर्चा
करेंगे
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साहित्य के द्वारा प्रचार : सुसमाचार जो पेपर पर प्रिंट करते है
जो बुल्केट या पर्ची के रूप में हम लोगो को बाँटते है. यह तरीका काफी प्रभावशाली
है क्योंकि बुद्धिजीवी लोग इसे पढके सच्चाई को जान सकते है. इसमें कोई सवाल जवाब
नहीं होता. इसमें गवाही की किताब काभी
प्रभावशाली हो सकती है. लेकिन इसमें सभी लोग पढ़ नहीं सकते इसलिए अनपढ़ लोग उससे
वंचित रह सकते है.
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रेडियो और टी वि के द्वारा प्रचार :
रेडियो और टीवी के द्वारा सुसमाचार उन लोगो तक पहुँच सकता है जहा कोई नहीं पहुँच
सकता. हर घरो में टीवी और रेडियो है. ऐसे कितने देश है जहा सुसमाचार बंदिस्त है
लेकिन उन देशो के हर घर में सुसमाचार इस माध्यम के द्वारा पहुँच सकता है . लेकिन
यह प्रचार मेहेंगा है और हर कोई इसे कर नहीं सकता.
·
बड़ी सभाओ में प्रचार- इस में हजारो की
भीड़ इकट्ठा होती है और एक ही बार में लाखो लोग वचन सुन सकते है और बहुत बड़ा प्रभाव
कम समय होता है . लोगो का विश्वास भी काफी जल्दी बढ़ता है जब लोग ऐसी बड़ी सभा में
परमेश्वर के बड़े कामो को देखते है. लेकिन हर कोई इसे भी नहीं कर सकता क्योंकि इसमें
काफी पैसा और प्लानिंग की जरुरत है.
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व्यक्तिगत सुसमाचार प्रचार : यह
सुसमाचार का सबसे प्रभावशाली तरीका है जिसमे एक व्यक्ति दुसरे एक व्यक्ति को
प्रचार करके चेला बना सकता है. यह अक्सर व्यक्तिगत संबध के आधार पर है इसलिए काफी
प्रभावशाली. है. और हर विश्वासी इसे कर सकता है.
सुसमाचार सभी तरीके अच्छे है
लेकिन व्यक्तिगत सुसमाचार प्रचार और अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि हर विश्वासी इसे
कर सकता है .
व्यक्तिगत सुसमाचार प्रचार का तरीका
परिचय: यह बाइबल की प्रमुख सच्चाइयों को प्रस्तुत करने का बस एक
तरीका है ताकि एक व्यक्ति आस्तिक बन सके। कोई भी विधि "प्रेरित" नहीं है,
लेकिन यह सुसमाचार के मूलभूत सत्य को प्रस्तुत करने का एक अच्छा,
संपूर्ण तरीका है ताकि मसीह को प्राप्त करने का निर्णय लेने वाले
व्यक्ति के लिए वास्तविक निर्णय लेने की काफी संभावना हो।
दो प्रमुख परिचयात्मक प्रश्न:
सवाल 1 : हर
कोई जो इस दुनिया में आता है एक दिन उसे इस दुनिया को छोड़ना है कोई 30 साल में तो कोई 50 तो कोई 70 साल में. मान लीजिये आज
आपको दुनिया छोडनी पड़े तो क्या आपको निश्चय है की आप स्वर्ग में ही जायेंगे.
- यदि उनका उत्तर "नहीं" है,
तो सीधे नीचे दी गई सुसमाचार प्रस्तुति पर जाएँ। यदि वे
"हाँ" उत्तर देते हैं तो आपको उनसे दूसरा प्रश्न पूछना होगा:
सवाल 2 :मानलो
की आप स्वर्ग के दरवाजे पर खड़े है और परमेश्वर आप से पूछता है की मै को तुम्हे
अपने राज्य में आने दू? तो आपका क्या उत्तर होगा
यहाँ पर अधिकांश लोग कहेंगे मैंने अच्छे धर्म के काम किये इसलिए मै
परमेश्वर से कहूँगा मुझे अन्दर आने दो . यहाँ से आप सुसमाचार सुनाना शुरू कर सकते
है.
1.अनुग्रह :स्वर्ग एक उपहार है इसे हम कमा नहीं सकते.
रोमियो 6:23
2. परमेश्वर –
परमेश्वर न्यायी है इसलिए वो हमारे
का न्याय करेंगे
लेकिन परमेश्वर प्रेमी भी वह हमे बचाना चाहते है इसलिए ( 1 युहन्ना 4:8)
3. मनुष्य -
मनुष्य कौन है इसके बारे में बात करें। जिस व्यक्ति को आप देख रहे हैं उसे दो
बातें समझने की जरूरत है:
1) मनुष्य पापी है - रोम। 3:10 और
23 पाप का अर्थ है "निशान
चूकना" (चित्रण: तीर चलाना)
2) वह स्वयं को नहीं बचा सकता - ईसा। 64:6
- अर्थात हमारे "अच्छे" कर्म भी भगवान की दृष्टि में गन्दी
पट्टियों के समान हैं!
(उदाहरण: यदि आप प्रतिदिन केवल 3
पाप करते हैं जो 1000 पाप/वर्ष x आपकी
आयु के बराबर है)
4. ईसा मसीह –
इस स्थान पर यीशु को विस्त्रुत
प्रस्तुत करे , वो कौन है और उसने हमारे लिए क्या किया और कैसे बलिदान हमे बचा
सकता है
5. विश्वास : यीशु को प्रभु जानकार अंगीकार करना
रोमियो 10:9- 10,
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